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Zomato से फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा, प्लेटफॉर्म फीस में कंपनी ने कर दिया इतना इजाफा

 Published : Mar 20, 2026 04:52 pm IST,  Updated : Mar 20, 2026 05:37 pm IST

प्री-जीएसटी आधार पर जोमैटो का प्लेटफॉर्म फीस अब प्रति ऑर्डर ₹14.90 कर दिया गया है। अक्सर देखा गया है कि जोमैटो और स्विगी एक दूसरे को फॉलो करते आए हैं।

इससे पहले कंपनी ने आखिरी बार सितंबर 2025 में इस शुल्क में बढ़ोतरी की थी।- India TV Hindi
इससे पहले कंपनी ने आखिरी बार सितंबर 2025 में इस शुल्क में बढ़ोतरी की थी। Image Source : PTI

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने अपने ऐप पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूज़र्स से वसूले जाने वाले प्लेटफॉर्म शुल्क में ₹2.40 प्रति ऑर्डर की बढ़ोतरी कर दी है। अब प्री-जीएसटी आधार पर जोमैटो का प्लेटफॉर्म शुल्क ₹12.50 से बढ़ाकर ₹14.90 प्रति ऑर्डर कर दिया गया है। इससे पहले कंपनी ने आखिरी बार सितंबर 2025 में इस शुल्क में बढ़ोतरी की थी। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, वहीं, जोमैटो की प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी भी टैक्स सहित ₹14.99 प्रति ऑर्डर का प्लेटफॉर्म शुल्क वसूल रही है, जो पहले ₹12.50 था। आमतौर पर देखा गया है कि ये दोनों कंपनियां इस तरह के शुल्क में बदलाव के मामले में एक-दूसरे को फॉलो करती हैं।

रैपिडो ने Ownly लॉन्च की

खबर के मुताबिक, यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अर्बन मोबिलिटी स्टार्टअप रैपिडो ने बेंगलुरु में अपनी फूड डिलीवरी सेवा Ownly लॉन्च की है। रैपिडो का कहना है कि वह ग्राहकों या रेस्टोरेंट्स से डिलीवरी चार्ज के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगा। जौमेटो की नई प्‍लेटफॉर्म फीस आज यानी 20 मार्च से ही लागू हो गई है। कंपनी की तरफ से यह बढ़ोतरी मिडिल ईस्‍ट में तनाव के बीच की गई है।


कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्‍लाई बाधित होने से देश भर में होटल और रेस्टोरेंट पर इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। जोमैटो की तरफ से की गई यह बढ़ोतरी ईंधन की ज्यादा लागत डिलीवरी के काम पर असर डाल सकती है। इससे प्लेटफॉर्म से जुड़े रेस्टोरेंट और डिलीवरी पार्टनर दोनों पर असर हो सकता है। आसान भाषा में समझें कि यूजर्स के लिए अब हर ऑर्डर पर कुल बिल ज्यादा आएगा।

क्विक कॉमर्स कंपनियां ये चार्ज भी वसूलती हैं

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी चार्ज के अलावा भी कुछ अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं, जिन्हें हैंडलिंग फीस कहा जाता है। यह शुल्क आमतौर पर नाज़ुक सामान को सावधानी से संभालने या कम मूल्य के ऑर्डर पर छोटी फीस के रूप में वसूला जाता है, ताकि प्लेटफॉर्म अपनी लागत की भरपाई कर सके। इसके अलावा, बारिश के दौरान डिलीवरी पार्टनर्स को होने वाली अतिरिक्त परेशानी को ध्यान में रखते हुए रेन फीस भी ली जाती है। इन शुल्कों के अलावा, जब प्लेटफॉर्म पर पीक आवर्स में ऑर्डर की संख्या बढ़ जाती है, तो यूज़र्स को सर्ज फीस भी देनी पड़ सकती है, जो बढ़ती मांग के दौरान लागू की जाती है।

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